स्ट्रोक या नस की चोट के बाद दिमाग़ और शरीर बार-बार, सही तरीक़े से अभ्यास करके हलचल फिर से सीख सकते हैं। न्यूरो फिजियोथेरेपी का लक्ष्य ताक़त, संतुलन, चलना और रोज़ के कामों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
हम मरीज़ और परिवार के साथ मिलकर सही लक्ष्य तय करते हैं और देखभाल करने वालों को घर पर सुरक्षित मदद करना सिखाते हैं, क्योंकि सेशन के बीच लगातार अभ्यास से बड़ा फ़र्क़ पड़ता है।
आम लक्षण
- शरीर के एक तरफ़ कमज़ोरी
- चलने में दिक़्क़त या संतुलन बिगड़ना
- मांसपेशियों में अकड़न (स्पैस्टिसिटी)
- चेहरे की कमज़ोरी (बेल्स पाल्सी)
- हाथ से काम करने में दिक़्क़त
आम कारण
- स्ट्रोक (लकवा / हेमिप्लीजिया)
- बेल्स पाल्सी
- नसों की चोट
- पार्किंसंस रोग
- उम्र के साथ संतुलन की समस्या
हम इलाज कैसे करते हैं
- 1.रोज़ के कामकाज और नसों की जाँच
- 2.इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन से मांसपेशियों को सक्रिय करना
- 3.काम आधारित ट्रेनिंग (बैठकर उठना, चलना, हाथ बढ़ाना)
- 4.संतुलन और गिरने से बचाव के व्यायाम
- 5.परिवार की ट्रेनिंग और घर का व्यायाम प्लान
इलाज डॉ. अंजलि गुप्ता (PT), महिला फिजियोथेरेपिस्ट (BPT (BU Rajasthan)), ख़ुद करती हैं। वे ड्राई नीडलिंग, कपिंग, IASTM और काइनेसियो टेपिंग में प्रमाणित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी कब शुरू करें?
जैसे ही इलाज करने वाले डॉक्टर कहें कि मरीज़ की हालत स्थिर है। जल्दी शुरू हुआ रिहैबिलिटेशन आमतौर पर बेहतर नतीजे देता है।
क्या बेल्स पाल्सी में फिजियोथेरेपी से फ़ायदा होता है?
हाँ। चेहरे के व्यायाम, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन और सही मार्गदर्शन दवाओं के साथ ठीक होने में मदद करते हैं।
क्या स्ट्रोक के कई महीने बाद भी सुधार हो सकता है?
हाँ। सुधार अक्सर शुरू में सबसे तेज़ होता है, लेकिन नियमित अभ्यास से कई लोग लंबे समय तक बेहतर होते रहते हैं।