कमर दर्द फिजियोथेरेपिस्ट के पास आने का सबसे आम कारण है। डेस्क पर लंबे घंटे, भारी वज़न उठाना, घर का काम, कमज़ोर कोर मांसपेशियाँ या अचानक ग़लत तरीक़े से मुड़ना, इन सबसे ऐसा दर्द हो सकता है जिसमें बैठना, झुकना और सोना तक मुश्किल हो जाता है।
आशियाना-दीघा रोड पर MuvAgain में हम सिर्फ़ दर्द को दबाते नहीं हैं। हम आपका पोस्चर, लचीलापन, कोर की ताक़त और चलने-फिरने का तरीक़ा जाँचकर पता करते हैं कि दर्द क्यों हो रहा है, फिर ऐसा प्लान बनाते हैं जो दर्द कम करे और उसे दोबारा आने से रोके।

आम लक्षण
- कमर के निचले हिस्से में हल्का दर्द या जकड़न
- आगे झुकने या कुर्सी से उठने पर दर्द
- मांसपेशियों में ऐंठन या कमर 'अटक' जाना
- देर तक बैठने या खड़े रहने के बाद दर्द
- सुबह की जकड़न जो चलने-फिरने से कम हो जाती है
आम कारण
- ग़लत तरीक़े से बैठना और डेस्क पर लंबे घंटे
- वज़न उठाने से मांसपेशियों में खिंचाव
- लम्बर स्पॉन्डिलोसिस (उम्र के साथ घिसाव)
- कमज़ोर कोर और कूल्हे की मांसपेशियाँ
- नियमित व्यायाम की कमी और बैठे रहने वाली जीवनशैली
हम इलाज कैसे करते हैं
- 1.पोस्चर, रीढ़ की गतिशीलता और मांसपेशियों की ताक़त की पूरी जाँच
- 2.इलेक्ट्रोथेरेपी (IFT/TENS), कपिंग या ड्राई नीडलिंग से दर्द में राहत
- 3.जकड़ी हुई मांसपेशियों के लिए मैनुअल थेरेपी
- 4.कोर को मज़बूत करने और लचीलेपन के व्यायाम
- 5.घर और ऑफ़िस के लिए बैठने-उठने की सलाह
इलाज डॉ. अंजलि गुप्ता (PT), महिला फिजियोथेरेपिस्ट (BPT (BU Rajasthan)), ख़ुद करती हैं। वे ड्राई नीडलिंग, कपिंग, IASTM और काइनेसियो टेपिंग में प्रमाणित हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कमर दर्द में कितने सेशन लगते हैं?
नए (एक्यूट) कमर दर्द में अक्सर 4 से 6 सेशन में साफ़ फ़र्क़ दिखता है। पुराने दर्द में ज़्यादा समय लग सकता है। पहली जाँच के बाद आपको अंदाज़ा बता दिया जाता है।
क्या कमर दर्द में पूरा बेड रेस्ट करना चाहिए?
आमतौर पर नहीं। लंबा बेड रेस्ट कमर को और जकड़ा और कमज़ोर बना सकता है। हल्की, सही तरीक़े से की गई हलचल ज़्यादा फ़ायदेमंद होती है। कौन-सी गतिविधि सुरक्षित है, यह फिजियोथेरेपिस्ट बताएँगी।
कमर दर्द में तुरंत डॉक्टर को कब दिखाएँ?
अगर कमर दर्द के साथ पेशाब या मल पर नियंत्रण न रहे, जांघों के बीच सुन्नपन हो, पैरों में कमज़ोरी बढ़ती जाए, बुख़ार हो या हाल में गंभीर रूप से गिरे हों, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।